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swastik paharia

गुरु जी मेरी लागी लगन मत तोड़ना गुरु जी मेरी उंगली पकड मत छोडना.... सभा बैठाई मैने आपके नाम की मेरे भरोसे मत छोड़ना ... ओ गुरुवर मेरे भरोसे मत छोड़ना... आज मेरे घर आदीनाथ आये आज मेरे घर महावीर आये तू भी मेरे घर आना ... ओ गुरुवर तू भी मेरे घर आना गुरु जी मेरी लागी लगन मत तोड़ना गुरु जी मेरी उ..

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गली पकड मत छोडना.... ओ गुरुवर चोका लगाया मैने ... तेरे नाम का मेरे भरोसे मत छोड़ना ... ओ गुरुवर मेरे भरोसे मत छोड़ना.... गुरु जी मेरी लागी लगन मत तोड़ना गुरु जी मेरी उंगली पकड मत छोडना.... नदी हैं गहरी और नाव पुरानी... बीच भवर मे मत छोडना ... ओ गुरुवर बीच मझदार मे मत छोड़ना जी मेरी लागी लगन मत तोड़ना गुरु जी मेरी उंगली पकड मत छोडना.... 🙏🙏🙏

29-09-2019 02:53 am

आंकाक्षा जैन

✍🏻... *किसी विद्वान ने विवेकानंद जी से पूछा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए ?* *विवेकानंद जी ने सरल जवाब दिया कि -* *"टांग के बदले हाथ खींचो,* *समाज अपने आप ही आगे बढ़ेगा.... !!"*

28-09-2019 09:18 am

आकाक्षां जैन

*इस तरह मुस्कुराने की* *आदत डालिये कि ..!* *परिस्थिति भी आपको परेशान* *कर - कर के थक जाए ...!!* *और जाते जाते जिंदगी भी* *मुस्कुरा कर बोले ...!!!* *आप से मिल कर खुशी हुई ...!!!!*

24-09-2019 02:49 pm

mukesh paandya

गुरु माँ वात्सल्य की मूर्ति ह ,जिनके मुख मण्डल की शोभा से ह्र्दय में भक्ति का भाव और गुरु माँ की चर्या के प्रति नतस्तक होता ह ,हर व्यक्ति जो भी गुरु माँ के श्री चरणों मे आता ह वो धन्य हो जाता ह ।में यही भावना भाता हु की मुझे गुरु माँ के श्री चरणों की रज नित्य प्रति दिन मेरे मस्तक पर धारण करने क..

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ा सौभाग्य मिले ।यही कामना श्री गुरु माँ के चरणों में। मुकेश पाण्ड्या

19-09-2019 12:00 am

mukesh paandya

गुरु माँ एक वात्सल्य की मूर्ति ह ,जब से किशनगढ़ में गुरु माँ का मंगल प्रवेश हुआ ।कुछ समय गुरु माँ का प्रवास कुछ समय के लिए चातुर्मास के पहले भी रहा,लेकिन में गुरु माँ के दर्शन करने नही गया।मेरा विचार ऐसा था कि क्या पत्ता में ससंघ दर्शन को जाऊ और गुरु माँ ससंघ आशीर्वाद दे या देखे भी नही ।चातु..

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्मास के कलश स्थापना के बाद में मन को द्रढ करके जैन भवन गया।गुरु माँ आहार चर्या के बाद तख्ते पर विराजमान थी ससंघ भी विराजमान था ।गुरु माँ ने मुझसे नाम पूछा और कहा कि कहा से आये हो ।में शर्मिंदा हो गया कि अपने नगर में गुरु माँ विराजमान ह ,और में कितना पापी हु की दर्शन के लिए एक बार भी नही आया जिसका नतीजा की गुरु माँ को मुझसे पूछना पड़ रहा ह की कहा से आये हो । मेने उसी वक्त नियम लिया कि 24 घण्टे में एक बार गुरु माँ के दर्शन अवश्य करूंगा ,और इसी नियम के साथ मे प्रतिदिन गुरु माँ के एक बार दर्शन अवश्य करता हु।और साथ मे आशीर्वाद के साथ ह्र्दय को जो सुकून मिलता ह ,वो मुझे आजतक कभी नही मिला ।धन्य ह गुरु माँ जिन्होंने अपने वात्सल्य से मुझे धन्य किया । में अपनी गुरु माँ के श्री चरणों मे अपनी श्रद्धा का दो लाइन के साथ अपना उदगार व्यक्त करता हु । आपके ज्योत से नूर निकलता ह । दिले गम को सुरूर मिलता ह । जिनके शीश आपके श्री चरणों मे झुकते ह ,गुरु माँ उन्हें जीवन मे सब कुछ जरूर मिलता ह । गुरु माँ मेरे एवम मेरे परिवार पर अपना मंगलमय आशीर्वाद हर क्षण रखे ।यही मेरी भावना ह जो ह्र्दय से निकली ह ।कोई भी मेरे द्वारा गलती हुई ह ,तो गुरु माँ ससंघ श्री चरणों मे क्षमा चाहता हु ।

17-09-2019 11:02 am

aasha devi

दुनिया में मुर्दों को उठाने वाले लाख मिल जायेंगे पर जिंदा को समझने वाला एक भी नहीं मिलेगा.....

11-09-2019 07:21 am

srishtee jain

कितने हैं उपकार, आपके कैसे में बतलाऊ कितना हैं आप पर ,कैसे मैं दिखलाऊँ हनुमान ना बन पाऊ माँ श्रद्धा भी क्या होतीं है पुछो मेरे दिल से रोम रोम पुलकित होता हैं माता तुमसे मिलके दूर ना जाना माँ दूर ना जाना भूल ना जाना माँ भूल ना जाना

09-09-2019 05:03 am

Arvind kumar jain

वक्त ही हंसाता हे, वक्त ही रुलाता हे। वक्त ही हमें सब कुछ सिखाता है। जिसने वक्त को पहचान लिया वही अपनी मंजिल को पाता है वरना ये जीवन धरा का धरा रह जाता है।। वन्दामि गुरु माँ

04-09-2019 04:01 am

जीवन का सच

*"सुन लेने से"* *कितने सारे सवाल सुलझ जाते हैं...* *"सुना देने से"* *हम फिर से वहीं उलझ जाते हैं...!*

22-08-2019 09:10 am

Rajkumar jain Temani

प्रथम नमन् उनकों जिसने मुझे नमन् का अर्थ सिखाया चरण पूज्य पहले उनके जो चरणों में मुझको लाया हे गुरू मा आपके उपचारों को कैसे कहदे शब्दों में प्रथम ईश हो तुम,तुमने ही मुझे ईश्वर से मिलाया

22-08-2019 10:33 am

आकाक्षां जैन

🙏🙏🙏🌹🌹🙏🙏🙏 *आँखे* *दुनिया की तमाम मुसीबत* *समेट लेती हैं,* *जब रोती है तो* *दिलो को* *हिला देती हैं,* *और जब...* *बंद* *होती है तो* *दुनिया* *को रुला देती हैं...!*

17-08-2019 07:35 pm

Arvind Kumar Jain

मेरा प्रत्येक अष्टमी को व्रत रहता है पूर्ण रूप से जैन सिद्दांतों के अनुसार ।25 जुलाई को मेरा सिरोही इंटरव्यू देने जाना हुआ ।मुझे पता नही था कि उस दिन अष्टमी थी लेकिन अचानक मेरी पत्नी रेनू का फ़ोन आया की कुछ खाया तो नही आज अष्ठमी हे ।में सोचने लगा यहाँ जैन मंदिर कहा ढूंढूंगा और बाहर का पानी औ..

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र खाना भी नही खाऊंगा तो आज दिन भर कैसे रहूँगा पूरी रात बस में सफर भी करना होगा ।7 बजे बाद पानी भी नही पीना ।मेने सोचा व्रत करू आज या नही।पर हिम्मत रखी और विस्वास रखा जैन धर्म पर और व्रत का निर्णय ले लिया की कुछ भी हो जाए व्रत रखूँगा।अचानक किसी होटल वाले ने बताया कि पास में ही महावीर जैन चैत्यालय हे और पास में ही शेवताम्बेर जैन मंदिर भी हे जिसमे जैनियो के खाने की व्यवस्था है।मेरी ख़ुशी का ढिकाना नही था कि मुझे चैत्यालय में अभिषेक भी देखने को मिला और पास ही जैन धर्मशाला में शुद्ध खाना और मेरी बोतल भरने के लिए पानी भी मिला।में दिन में 1 बजे फ्री हो गया और मेरी बस रात को 8:25 पे थी तब तक में क्या करता बस स्टैंड प बहार का पानी भी नही पि सकता था ।में वहाँ से बाहर निकल तो एक श्वेताम्बर जैन धर्मशाला भी मिल गई मात्रा 50 रुपये के कमरे में ।और वही से मैने पानी भी भरा इस प्रकार मेरा व्रत सकुशल सम्पन हो गया ।सच में जैन धर्म सच्चा हे। जय जिनेन्द्र

07-08-2019 10:10 am