विनयांजलि

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*अजीब रिश्ता हैं मेरा गुरु माँ के साथ* *जब भी मुसीबत आती हैं,* *न जाने किस रूप मे आता हैं,* *हाथ पकड़ कर पार लगा देता हैं,* *मैं उसके सामने सिर झुकाता हूँ ,* *वो सबके के सामने मेरा सिर उठाता है।

Saroopa jain
Sirsaganj Firojabad

mukesh paandya
kishangarh

देती हो माँ कृपालु ,सब काम हो रहा ह, तेरी दया से माता ,आनंद हो रहा ह , जितना भी दे सको मा ,सब मन को भा रहा ह , आपकी चरण की रज को ,माथे लगा रहा हु। आपकी कृपा से माता ,आनंद हो रहा ह।


जिनके कंठ बसी जिनवाणी आगम का है ज्ञान भरा अमृत सी प्रिय ध्वनिबिखेरे शास्त्रों का है सार भरा यथा नाम तथा गुण है तुम्हारा फहराती धर्म पताका हो आत्म उद्धारक धर्म प्रचारक धर्म प्रभावी का सच्ची हो चरित्र चंद्रिका समाधि साधिका तपोमूर्ति समता निधि हो भारत गौरव से अलंकृत हो सबके ..

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ह्रदय में बसती हो त्याग तपस्या सदुपदेश से जिसका जग में नाम है माताश्री को मेरा कोटि कोटि प्रणाम । वन्दामि माताजी,वन्दामि माताजी,वन्दामि माताजी

02-10-2019 05:43 am
Premlata Jain
जयपुर

mukesh paandya
kishangarh

शत शत वन्दन गुरु माँ ,आपके श्री चरणों मे ,आपके दर्शन मात्र से होजाता ह ,जीवन धन्य ,मेंने यह नियम लिया कि दिन में एक बार गुरु माँ के श्री चरणों में आकर दर्शन करूंगा ।आपके आशीर्वाद से यह दर्शन लाभ प्रतिदिम मिलता रहे ,यही भावना भाता हु।