विनयांजलि

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बिन स्याही बेजान सा कलम हूं में जो ज्ञान रूपी स्याही आपने भारी मुझमें तो अब अमर हूं में अपनी मंजिल तक पहुंचने का सहारा आपको माना है मुझे तो सिर्फ अब आपके बताए मार्ग पर जाना है ये बेहती नदियां सूर्य की किरणे और धीमी - धीमी चलती हवाएं आज साक्षी है आपके दर्शन और मार्गदर्शन हो जहा..

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ं वहीं स्थान मोक्ष महल की सीढ़ी है मेरे मन मंदिर की भगवान है आप अगर हो गई हो कोई गलती तो करना हम माफ गुरु मां के चरणों में वन्दामि - वन्दामि - वन्दामि

20-02-2020 07:01 am
chirag Jain
delhi

Anita jain
Pachewar

हृदय धरा सिंचित करने को गुरु मां चाहिए तपती धूप में तरुवर छाँह पाने को मां का हाथ चाहिए संतप्त हृदय,विचलित मन शांत करने को स्पर्श स्नेह भरा चाहिए कांटो की संसार धरा पर संभलकर कदम बढ़ाने को विज्ञ - शक्ति मां चाहिए कर्म शैल से टकराने को विजय भरा विश्वास चाहिए हे माँ इस संसार से प..

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र होने के लिये तेरा आशीर्वाद चाहिए

20-02-2020 06:51 am

गुरु माँ के चरणो मे शत् शत् नमन खोए आश की चाह है गुरु माँ निराशा मे आशा की लौ है गुरु माँ उलझे सवालो का जवाब है गुरु माँ मन करम वचन इन तीनो पर विजय पाई है वो है गुरु माँ वो है गुरु माँ वो है गुरु माँ

Mrs. Darshan Jain
Delhi

monika Jain
monika Jain
Shri Ram Lal Jain Sandeep Kumar Jain Kirana Merchant Chhote Jain Mandir Ke Samne chhaprauli Baghpat

जो हंसाने वाले थे याद बनके रुलाने लगे है खुशियां देने वाले आशीर्वाद देके भी सताने लगे है जिनकी एक मुस्कुराहट पर ही धन्य समझ लेती थी अपने आपको आज वो ही गुरू माॅ मेरे सपनो मे आने लगी है