विनयांजलि

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जो हंसाने वाले थे याद बनके रुलाने लगे है खुशियां देने वाले आशीर्वाद देके भी सताने लगे है जिनकी एक मुस्कुराहट पर ही धन्य समझ लेती थी अपने आपको आज वो ही गुरू माॅ मेरे सपनो मे आने लगी है

monika Jain
monika Jain
Shri Ram Lal Jain Sandeep Kumar Jain Kirana Merchant Chhote Jain Mandir Ke Samne chhaprauli Baghpat

Rajkumar jain Temani
Malpura

ये गुरू मा का दरबार है ,यहाँ मनमानी नहीं होती । यह बात भी पक्की ह की यहां कोइ परेशानी नहीं होती। कुछ तों बात है मेरी गुरू मा,वरना यूही दुनियां इनकी दिवानी नहीं होती 🔔🔔🔔नमन् गुरू मा 🔔🔔🔔


आर्यखंड के गौरवशाली भारत देश की पृष्ठभूमि हमें प्राचीन काल से ही अनेक महान आर्यिका माताओं के जीवन से परिलक्षित कराती रही है जिन्होंने न सिर्फ इस शस्यश्यामला भूमि को अपितु सम्पूर्ण विश्व को आत्म परहित की भावना से कल्याणकारी मार्ग दिखाते हुए निज पर का उत्थान किया है ।उसी परंपर..

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ा में गणाचार्य विराग सागर जी की शिष्या परम पूज्य गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी जैसी अनमोल निधि इस जैन जगत को प्राप्त हुई है।जिनके व्यक्तित्व और कृत्तित्व के सम्मुख सभी नतमस्तक हैं जिनके गुणों का वर्णन करना सागर की गहराई और पर्वत की ऊंचाई को मापने सदृश कार्य है। जिनकी चरण रज से जंगल में मंगल हो जाता है। मां ने निज आत्मवैभव पाने हेतु लौकिक पारिवारिक वैभव का तृणवत त्याग कर दिया गुरु रुपी जौहरी द्वारा उपदेशित वैराग्यमयी वाणीरुपी आभूषणों से मानो निज का श्रृंगार कर लिया।ज्ञानरुपी सुरभि को आत्मसात कर उन ज्ञानकिरणो से निज पर के जीवन को प्रकाशित कर भव्यो को ज्ञानगंगा में अवगाहन कराया।गुरु की प्रतिछाया बन उनसे प्राप्त ज्ञान को जन जन में बांटकर ,अर्जुन के समान एक लक्ष्य बनाकर गुरुभक्ति का अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत करने वाली जन जन की प्रिय चारित्र चंद्रिका सिद्धार्थ वारिधि ,अनेक उपाधियों से अलंकृत ,ममता और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति ,परम श्रद्धेय , प्रात:वंदनीय ,अगणित गुणों की सरिता, उन्हीं परम पूज्य माताजी के श्रीचरणों में कोटि कोटि वंदन।।🙏🙏🙏🙏

20-02-2020 05:22 am
मोनिका जैन
गाजियाबाद

रतन लाल जैन
जोधपुर

गुरुमां को मानना है आसान किंतु गुरुमां की मानना है कठिन; क्योंकि गुरुमां को मानने में आ सकता है प्रसिद्धि का भाव कि मेरे भी गुरुमां हैं नहीं है मेरे जीवन में गुरुमां का अभाव गुरुमां को मानकर भी वह मानी हो सकता है लेकिन गुरुमां की न माने तो वह ज्ञानी कैसे हो सकता है? गुरुमां के देह..

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कार को नहीं गुण को जो देखता है, गुरुमां की बाह्य प्रसिद्धि को नहीं स्वयं के समर्पण को जो देखता है, वह गुरुमां का नाम जपकर अपने परिणाम सँभालता है, मैं गुरुमां का चेला हूँ बड़ा यह प्रमाण नहीं देता है। ऐसा शिष्य ही अंतरात्मा से निजानंद का अनुभव करता है तोड़कर संबंध सर्वजगत् का स्वयं में संपर्क साधता है। अहा! अद्भुत क्षण है यह जिसे मिला यह अवसर धन्य है वह वास्तव में गुरुमां की महिमा लिखी नहीं जाती विज्ञाश्री गुरुमां की निकटता बड़भागी को ही मिल पाती। वन्दामी गुरुमां रतन लाल जैन, जोधपुर

20-02-2020 01:57 am