विनयांजलि

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पल झूके और नमन हो जाए मस्तक झूठे,आओर वंदन हो जाते ऐसी नज़र, कहां से लाऊं कि तुझे याद करूं और तेरा दर्शन हो जाए श्रीमति कुसुम जैन तलवंडी कोटा

milap jain
kotaraj

milap jain
kotaraj

मैं चलता गया, रार-ते मिलते गये । राह के कांटे फूल बनकर खिलते ग्रे।। ये जादू नहीं आशीर्वाद है मेरे गुरु मां का। वरना उसी राह पर लाखों फिसलते ग्रे गुरु मां के चरणों में शत-शत वन्दामी


तुम्हे क्या पता है हम तुम्हे कितना याद करते है तुम्हारे नाम से ही हर सुबह की शुरुआत करते है हमारे हृदय की गहराईयो से पूछ लेना गुरु माॅ हर श्वास मे गुरु मा आपका नाम जपते है

monika Jain
Shri Ram Lal Jain Sandeep Kumar Jain Kirana Merchant Chhote Jain Mandir Ke Samne chhaprauli Baghpat

मोनिका जैन
गाजियाबाद

गुरु मां के ज्ञान का अंत न यहां उन्होंने दी शिक्षा जहां निकली संस्कार की मूरत वहां गुरु मां की वाणी निरंतर बहती रहे नन्हीं सी कलियों को गुरु मां ने फूलों सा महका दिया आपके विश्वास ने हमको गुरु मां चांद सा चमका दिया। ।रजत दीक्षा महोत्सव पर गुरु मां को शत शत नमन।