विनयांजलि

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पिता चाहता है कि यह आज्ञाकारी ही बना रहे माँ चाहती है कि यह मेरा बेटा ही बना रहे बहन चाहती है कि यह मेरा भ्राता ही बना रहे लेकिन विज्ञाश्री गुरुमां चाहती हैं यह स्वयं को इतना काबिल करे कि भगवत्ता को हासिल करे। इसीलिए गुरुमां बन जाती अधिवक्ता जो अनंतकाल से सताते हैं ऐसे कर्मरूपी ..

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्रतिद्वन्द्वी से भी जिताती है यह मत सोचो कि यह तो गुरुमां का फर्ज है सच्चा शिष्य कहता - मुझ पर गुरुमां का यह बहुत बड़ा कर्ज है जिसका सामान्य ब्याज भी चुका नहीं सकता मैं! फिर मूल चुकाने की तो बात कैसे कर सकता मैं !! सच है, गुरुमां के गुण अगम हैं जिनका स्थिर मन देख हिमगिरि भी पिघल जाता है जिनका गंभीर चारित्र देख प्रशांत महासागर का उफान भी रुक जाता है जिनकी क्षमा भाव की शीतलता देख अनल उगलता मरुथल भी ठंडा पड़ जाता है ऐसे ही संतों में श्रेष्ठ गणिनी विज्ञाश्री गुरुमां अनेक गुणों की धाम हैं उन्हें त्रियोग से मेरा वन्दन है। शत शत नमन रतन लाल जैन, जोधपुर

20-02-2020 01:52 am
रतन लाल जैन
जोधपुर

रतन लाल जैन
जोधपुर

लाख दुनिया समझाये पर गुरुमां का समझाना अलग ही बात है, लाख कोई अपनाये पर गुरुमां का अपनाना अलग ही बात है, लाख जुगनू टिमटिमाये पर सूर्य का उगना अलग ही बात है; क्योंकि गुरुमां हैं धड़कन नाड़ी की फड़कन चाहे कितना ही काम करें अन्य अंग पर हृदय की अपनी अलग ही अस्मिता है, चाहे कितने ही काम ..

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ये अन्यजन पर गुरुमां की एक अलग ही विधा है, गुरुमां की कृपा की रसधार के आगे अमृत रसायन से भरा घट भी लगता रीता है। गुरुमां की दृष्टि है निराली जिस पर पड़ जाये उसे लगता है आ गई दीवाली, समस्त दुविधा को हरने वाली अंध नयन में भी मानो नव ज्योत भरने वाली। गुरुमां की महिमा को हजारों जिह्वा भी गाएँ पर महिमा शेष ही रह जाती, ऐसे गुरुमां विज्ञाश्री के गुण लिखते-लिखते लेखनी भी थम जाती। शत शत नमन वन्दामी रतन लाल जैन, जोधपुर

20-02-2020 01:49 am

NILESH JAIN
HAZARIBAG

Nikita Jain
Jaipur

बहुत चिंतन बहुत विचार करने के बाद भी केवल एक ही बात का बोध हुआ मुझे! कि मेरे कलम में वो ताकत ही नहीं जो आपके गुणों का वर्णन कर सके!!! 🙏वन्दामि माताजी🙏