विनयांजलि

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🙏विज्ञामां के दरश मिले खुशियों के फूल खिले दरश से जिनके सुख रवि चमके दुख की शाम ढले मन मंदिर में हो उजियारा ज्ञान की ज्योति जले भव भव के पातक धुल जाते मां के चरण तले भक्ति भाव से हम ध्याते मन की आस फले ।।विज्ञाश्री मां के चरणों में शत शत नमन।।🙏

मोनिका जैन
गाजियाबाद

Rajkumar jain Temani
Malpura

गुरू मा ने अलख जगा ,घर घर किया उजाला। सबके बिगड़े काम बनाऐ,दुख से मिला छुटकारा 🕯🕯गुरू मा के चरणों में बारम्बार वंदन हमारा 🕯🕯 ☝️☝️🇦🇪🇦🇪☝️☝️🇦🇪🇦🇪☝️☝️🇦🇪🇦🇪☝️☝️


bas vahi gufumaa kahlati h. jivan k ghor Andheri me Prakash jo lekar aati h.har leti h vo dukh saare khushiyon ki fasal ugati h.sagar se Gyan se Bhari hui bas vahi gurumaa kahlati h.

Shilpa jain
delhi

vinod patni
kishangarh

सोचता हूं सागर जितना , दे पाता , गागर सी सौगात कहीं | तेरा क्या गुणगान करूं है गुरु मां, बूंद सी मेरी औकात नहीं || रवि किरणों से बढ़कर आगे , अखिल विश्व में फैल रही, ज्ञान की दिव्य रश्मिया| पर यह ना कह देना ,बेबस बादल के आगे ,नहीं-नहीं, सूरज में भी वह बात नहीं || तेरा क्या गुणगान करूं है ..

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ुरु माँ, बूंद सी मेरी औकात नहीं || चरणों में आपके आकर, पाते ऐसी शीतलता, जिसके वर्णन को कोई शब्दकोश नहीं | उससे बढ़कर शीतलता, आज बिखेरे चांद चांदनी, ऐसी कोई रात नहीं || तेरा क्या गुणगान करूं है गुरु मां, बूंद सी मेरी औकात नहीं || तन मन मंगल ,जन-जन का होता मंगल, पुण्य होता जिसका , पडते आपके चरण वही | कदम कदम पर आज बिछा दूं चरणों में, पर मिलते नहीं पुष्प पारिजात कहीं || तेरा क्या गुणगान करूं है गुरु माँ, बूंद सी मेरी औकात नहीं || गुरु मां के चरणों में शत शत नमन विनोद पाटनी (बस्सी वाले) किशनगढ़

22-02-2020 10:40 am