विनयांजलि

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वन्दामि माता जी मैं एक तुच्छ प्राणी हूं आपका आशीर्वाद मेरे ऊपर रहे जैसा आप कहें मैं वैसे करुं जिस पर पर ले जाएं मैं चलूं

Veena Jain
Delhi

अशोक कुमार जैन
दिल्ली

जो कुछ भी गुरु की इच्छा है उसके अतिरिक्त मेरी इच्छा हो ही क्या ,करती है जैसा आप रखें मैं वैसा ही हू । मेरे भाव ये ही है कि आपका हाथ मेरे ऊपर रहे


हे मात गुरु द्रोण तुम, मैं एकलव्य तुम्हारा । कर से दो आशीष तो निखर जाय जीवन मेरा । बस अब रह गया है एक ही सपना अधूरा । वीर प्रभु सम लगे जल्द समवसरण तुम्हारा । और उसी समवसरण से मिले हमे मुक्तिमहल हमारा ।। वंदामी माताजी🙏🏻🙏🏻🙏🏻 -रीतेश दोशी भांडुप, मुंबई

Ritesh Doshi
Ritesh Doshi
Mumbai

alka jain
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